Wednesday, February 28, 2024

Kya Jaipur Kya Dilli

Kya Jaipur Kya Dilli Lyrics | Kya Jaipur Kya Dilli Lyrics in Hindi | Kya Jaipur Kya Dilli Lyrics Rahgir | Kya Jaipur Kya Dilli Rahgir Lyrics | Kya Jaipur Kya Dilli Lyrics in English

Kya Jaipur Kya Dilli (क्या जयपुर क्या दिल्ली) is a Hindi song by Rahgir. The song is composed, penned, and sung by Rahgir, whereas Shubhodeep Roy has produced the music of the song. Rahgir’s Kya Jaipur Kya Dilli lyrics in Hindi and in English are provided below.

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Chomu ke chaurahe par ek boodha baitha nanga
Aate-jaaton ko poochta ki kyon bhai changa?
Jo ruk jaata use bolta ki sun, bhai setha
Arey, ja Agra, munh mein le-le Agre ka petha

Ya Jaipur ja ke rangwa le pichhwada gulabi
Mujhe laga ke koyi pagal hai ya phir sharabi
Main vela tha, ja baith gaya uske baaju mein
Poocha, “Babaji, kyun laayi hai tune yeh chillam-chilli?”

Woh bola…
Jahilon ka koyi sheher nahi, kya Jaipur, kya Dilli
Arey, jahilon ka koyi sheher nahi, kya Jaipur, kya Dilli
Arey, kya Jaipur, kya Dilli, bhai re, kya Jaipur, kya Dilli
Jahilon ka koyi sheher nahi, kya Jaipur, kya Dilli

Arey, kya Jaipur, kya Dilli, kya Patna, Ludhiyana, Chandigarh
Ambarsar, Bambai, Shimla, Manali, Kullu, Chamba, Sikar, Jhunjhunu
Kota, Churu, Kashi, Kochi, Goa, Ranchi, Calcutta, Indore, Chennai
Guwahati, Aizawl, Madurai, Sirsa, Surat aur Tiruchippalli

Jahilon ka koyi sheher nahi, kya Jaipur, kya Dilli
Arey, Jahilon ka koyi sheher nahi, kya Jaipur, kya Dilli

Woh bola, mere gaanv mein ek shaam ek banda ghar pe lauta thaka-haara
Uski beevi gayi thi padosiyon se maangne bhains ka chaara
Par us bande ko ghar aate hi chai chahiye hoti thi
Aur nahi kisi ki iss baare mein rai chahiye hoti thi

Woh lauti ghar toh dhar liya usko, diye laat aur ghoose
Arey, moot nikal gaya salwar mein, khoon nikal gaya munh se
Arey, moot nikal gaya salwar mein, khoon nikal gaya munh se

Phir usi haal mein pakad bhagona gayi kitchen ke andar
Ek aag wahan chulhe mein thi, ek uske mann ke andar
Ek aag wahan chulhe mein thi, ek uske mann ke andar
Ek aag wahan chulhe mein thi, ek uske mann ke andar

Aur dukh ki baat toh yeh hai aise qisse aam hain har kshetra mein
Plain ho chaahe hilly
Dukh ki baat toh yeh hai aise qisse aam hain har kshetra mein
Plain ho chaahe hilly

Kyonki
Jahilon ka koyi sheher nahi, kya Jaipur, kya Dilli
Arey, jahilon ka koyi sheher nahi, kya Jaipur, kya Dilli
Arey, kya Jaipur, kya Dilli, bhai re, kya Jaipur, kya Dilli
Jahilon ka koyi sheher nahi, kya Jaipur, kya Dilli

Arey, kya Jaipur, kya Dilli, kya Patna, Ludhiyana, Chandigarh
Ambarsar, Bambai, Shimla, Manali, Kullu, Chamba, Sikar, Jhunjhunu
Kota, Churu, Kashi, Kochi, Goa, Ranchi, Calcutta, Indore, Chennai
Guwahati, Aizawl, Madurai, Sirsa, Surat aur Tiruchippalli

Jahilon ka koyi sheher nahi, kya Jaipur, kya Dilli
Arey, Jahilon ka koyi sheher nahi, kya Jaipur, kya Dilli

Mujhe laga ke baba hai kuch jyada hi badbola
Par usne meri baat kaat di, jaise hi munh khola
Bola, Khandela ke bazar ek shaam hua yeh qissa
Ke ek thele se ek bhooke ne utha liya ek samosa

Phir wahan khade the
Sab ne dhoya de moochhon pe taav, woh Darasingh ho gaye
Aur ghar ja ke
Apni-apni beeviyon ki baahon mein so gaye

Agle din usi chauk par, usi jagah par
Ek sisakte majdoor ke ek thekedar bhai kha gaya paise
Aur wahin khade the chuppi saadhe moochhon waale bhainse

Arey, seena dhans gaya, moonchein neechi, ho gayi knicker dheeli
Arey, seena dhans gaya, moonchein neechi, ho gayi knicker dheeli
Isiliye toh kisi shaane ne kaha hai

Ke jahilon ka koyi sheher nahi, kya Jaipur, kya Dilli
Arey, jahilon ka koyi sheher nahi, kya Jaipur, kya Dilli
Arey, kya Jaipur, kya Dilli, bhai re, kya Jaipur, kya Dilli
Jahilon ka koyi sheher nahi, kya Jaipur, kya Dilli

Arey, kya Jaipur, kya Dilli, kya Patna, Ludhiyana, Chandigarh
Ambarsar, Bambai, Shimla, Manali, Kullu, Chamba, Sikar, Jhunjhunu
Kota, Churu, Kashi, Kochi, Goa, Ranchi, Calcutta, Indore, Chennai
Guwahati, Aizawl, Madurai, Sirsa, Surat aur Tiruchippalli

Jahilon ka koyi sheher nahi, kya Jaipur, kya Dilli
Arey, Jahilon ka koyi sheher nahi, kya Jaipur, kya Dilli
Arey, Jahilon ka koyi sheher nahi, kya Jaipur, kya Dilli

चोमू के चौराहे पर एक बूढ़ा बैठा नंगा
आते-जातों को पूछता कि क्यों भाई चंगा?
जो रुक जाता उसे बोलता की सुण, भाई सेठा
अरे, जा आगरा, मुँह में ले-ले आगरे का पेठा

या जयपुर जा के रंगवा ले पिछवाड़ा गुलाबी
मुझे लगा कि कोई पागल है या फ़िर शराबी
मैं वेला था, जा बैठ गया उसके बाजू में
पूछा, “बाबाजी, क्यूँ लाई है तूने ये चिल्लम-चिल्ली?”

वो बोला…
जाहिलों का कोई शहर नहीं, क्या जयपुर, क्या दिल्ली
अरे, जाहिलों का कोई शहर नहीं, क्या जयपुर, क्या दिल्ली
अरे, क्या जयपुर, क्या दिल्ली, भाई रे, क्या जयपुर, क्या दिल्ली
जाहिलों का कोई शहर नहीं, क्या जयपुर, क्या दिल्ली

अरे, क्या जयपुर, क्या दिल्ली, क्या पटना, लुधियाना, चंडीगढ़
अंबरसर, बंबई, शिमला, मनाली, कुल्लू, चंबा, सीकर, झुंझुनू
कोटा, चूरू, काशी, कोच्चि, गोवा, राँची, कलकत्ता, इंदौर, चेन्नई
गुवाहाटी, आईज़ोल, मदुरई, सिरसा, सूरत और तिरुचिपल्ली

जाहिलों का कोई शहर नहीं, क्या जयपुर, क्या दिल्ली
अरे, जाहिलों का कोई शहर नहीं, क्या जयपुर, क्या दिल्ली

वो बोला, मेरे गाँव में एक शाम एक बंदा घर पे लौटा थका-हारा
उसकी बीवी गई थी पड़ोसियों से माँगने भैंस का चारा
पर उस बंदे को घर आते ही चाय चाहिए होती थी
और नहीं किसी की इस बारे में राय चाहिए होती थी

वो लौटी घर तो धर लिया उसको, दिए लात और घूँसे
अरे, मूत निकल गया सलवार में, खून निकल गया मुँह से
अरे, मूत निकल गया सलवार में, खून निकल गया मुँह से

फिर उसी हाल में पकड़ भगोना गई kitchen के अंदर
एक आग वहाँ चूल्हे में थी, एक उसके मन के अंदर
एक आग वहाँ चूल्हे में थी, एक उसके मन के अंदर
एक आग वहाँ चूल्हे में थी, एक उसके मन के अंदर

और दुख की बात तो ये है ऐसे क़िस्से आम हैं हर क्षेत्र में
Plain हो चाहे hilly
दुख की बात तो ये है ऐसे क़िस्से आम हैं हर क्षेत्र में
Plain हो चाहे hilly

क्योंकि
जाहिलों का कोई शहर नहीं, क्या जयपुर, क्या दिल्ली
अरे, जाहिलों का कोई शहर नहीं, क्या जयपुर, क्या दिल्ली
अरे, क्या जयपुर, क्या दिल्ली, भाई रे, क्या जयपुर, क्या दिल्ली
जाहिलों का कोई शहर नहीं, क्या जयपुर, क्या दिल्ली

अरे, क्या जयपुर, क्या दिल्ली, क्या पटना, लुधियाना, चंडीगढ़
अंबरसर, बंबई, शिमला, मनाली, कुल्लू, चंबा, सीकर, झुंझुनू
कोटा, चूरू, काशी, कोच्चि, गोवा, राँची, कलकत्ता, इंदौर, चेन्नई
गुवाहाटी, आईज़ोल, मदुरई, सिरसा, सूरत और तिरुचिपल्ली

जाहिलों का कोई शहर नहीं, क्या जयपुर, क्या दिल्ली
अरे, जाहिलों का कोई शहर नहीं, क्या जयपुर, क्या दिल्ली

मुझे लगा कि बाबा है कुछ ज्यादा ही बड़बोला
पर उसने मेरी बात काट दी, जैसे ही मुँह खोला
बोला, खंडेला के बाज़ार एक शाम हुआ ये क़िस्सा
कि एक ठेले से एक भूखे ने उठा लिया एक समोसा

फिर वहाँ खड़े थे
सब ने धोया दे मूँछों पे ताव, वो दारासिंह हो गए
और घर जा के
अपनी-अपनी बीवियों की बाँहों में सो गए

अगले दिन उसी चौक पर, उसी जगह पर
एक सिसकते मजदूर के एक ठेकेदार भाई खा गया पैसे
और वहीं खड़े थे चुप्पी साधे मूँछों वाले भैंसे

अरे, सीना धँस गया, मूँछें नीची, हो गई निक्कर ढीली
अरे, सीना धँस गया, मूँछें नीची, हो गई निक्कर ढीली
इसी लिए तो किसी शाने ने कहा है

कि जाहिलों का कोई शहर नहीं, क्या जयपुर, क्या दिल्ली
अरे, जाहिलों का कोई शहर नहीं, क्या जयपुर, क्या दिल्ली
अरे, क्या जयपुर, क्या दिल्ली, भाई रे, क्या जयपुर, क्या दिल्ली
जाहिलों का कोई शहर नहीं, क्या जयपुर, क्या दिल्ली

अरे, क्या जयपुर, क्या दिल्ली, क्या पटना, लुधियाना, चंडीगढ़
अंबरसर, बंबई, शिमला, मनाली, कुल्लू, चंबा, सीकर, झुंझुनू
कोटा, चूरू, काशी, कोच्चि, गोवा, राँची, कलकत्ता, इंदौर, चेन्नई
गुवाहाटी, आईज़ोल, मदुरई, सिरसा, सूरत और तिरुचिपल्ली

जाहिलों का कोई शहर नहीं, क्या जयपुर, क्या दिल्ली
अरे, जाहिलों का कोई शहर नहीं, क्या जयपुर, क्या दिल्ली
अरे, जाहिलों का कोई शहर नहीं, क्या जयपुर, क्या दिल्ली

Song Credits

Lyricist(s):
Rahgir
Composer(s):
Rahgir
Music:
Shubhodeep Roy
Music Label:
Rahgir
Featuring:
Rahgir

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