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Wajle Ki Bara Lyrics Meaning in Hindi
Wajle Ki Bara एक स्त्री की बेचैनी, आकर्षण और अपने प्रेमी के साथ बिताए कुछ और पलों की इच्छा को दिखाता है। चैत्र की पूर्णिमा वाली रात में उसका मन प्रेम से भरा हुआ है और दिल इतनी तेज़ी से धड़क रहा है कि वह अपनी भावनाओं पर नियंत्रण नहीं रख पा रही। वह अपने प्रिय की इच्छा पर उससे मिलने आई है और उसके प्यार में पूरी तरह डूब चुकी है, लेकिन आधी रात हो जाने के कारण अब घर लौटना भी ज़रूरी है।
गीत में प्रेम के साथ समाज का डर भी जुड़ा हुआ है। गाँव के लोगों की नज़र उन दोनों पर है, रात बढ़ती जा रही है और छह तथा नौ बजे की गाड़ियाँ पहले ही निकल चुकी हैं। अब बारह बजे वाली आखिरी गाड़ी का समय हो गया है, इसलिए वह बार-बार अपने प्रेमी से उसे घर जाने देने को कहती है। फिर भी उसका मन जाने के लिए तैयार नहीं है। चाँदनी रात, प्रेमी की छेड़छाड़ और भीतर जागी चाहत उसके होश को भटका रही है।
Bela Shende की आवाज़ में गाया गया Wajle Ki Bara, मराठी लावणी की चंचलता और अदाओं के साथ इच्छा तथा झिझक के बीच फँसी स्त्री की मनःस्थिति सामने रखता है। इसके बोल Guru Thakur ने लिखे हैं और संगीत Ajay-Atul ने तैयार किया है। Natarang (Original Motion Picture Soundtrack) का यह गीत January 1, 2010 को रिलीज़ हुआ था और इसमें Atul Kulkarni तथा Sonalee Kulkarni दिखाई देते हैं। नीचे Wajle Ki Bara Lyrics का हिंदी और अंग्रेज़ी में अनुवाद अर्थ सहित दिया गया है, जिससे गीत में छिपे आकर्षण, सामाजिक संकोच और आधी रात को घर लौटने की बेचैनी को समझा जा सकता है।
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Ho, chait punvechi raat aaj aaliya bharaat
Dhad-dhad kaljaat majhya maayi na
Kadi, kava, kutha, kasa? Jeev jhala yedapeesa
Tyacha nhai bharvasa tol rhaai na
The full-moon night of Chaitra is in full bloom, and the pounding of my heart can no longer be contained. I do not know when, where, or how my heart became so madly consumed by love. It can no longer be trusted, and I am beginning to lose control of myself.
Raakhali ki marji tumchya jodina mi aale
Pirtichya ya rangi raya, chimb oli mi jhale
Raya, soda aata tari, kaal yel nhai bari
Punha bhetu kavatari, saajna
I honoured your wish and came here with you. My beloved, I have become completely drenched in the colours of your love. But please let me go now, for the time is not right. We shall meet again some other day, my love.
Mala jau dya na ghari (aata wajle ki bara)
Mala jau dya na ghari (aata wajle ki bara)
Mala jau dya na ghari (aata wajle ki bara)
Mala jau dya na ghari (aata wajle ki bara)
Please let me go home now, for the clock has already struck twelve.
Hey, kashapayi chhalta, maga-maga firta
Asa kaay karta daaji, hila bheta ki yetya bajari
Ayy, sahachi bi gaadi geli, navachi bi geli
Aata barachi gaadi nighali
Why are you troubling her and following her everywhere? Sir, do not behave this way; you can meet her again at the next market. The six o’clock train has already left, as has the one at nine, and now the midnight train is about to depart.
Hila jau dya na ghari (aata wajle ki bara)
Mala jau dya na ghari (aata wajle ki bara)
Jee-jee re, jee
Please let her go home now, for the clock has already struck twelve.
Please let me go home now, for the clock has already struck twelve.
Ho, ainyavani roop majha, ubhi jvanichya mi umbaryat
Nadavala khula-pisa kabutar he majhya urat
Bhavatali bhay ghaali raat mokat hi chandanyachi
Uga ghai kashapayi? Haye nazar ubhya gavachi
(Uga ghai kashapayi? Haye nazar ubhya gavachi)
My beauty gleams like a mirror, and I stand upon the threshold of youth. Within my chest, my heart flutters like a lovestruck, restless pigeon. This unrestrained moonlit night makes me apprehensive. Why are you in such a hurry? The entire village has its eyes upon us.
Ayy, shet aala raakhnila, raaghu jhala gola
Sheel ghali adun koni karun tirpa dola
Aata kasa kiti jhaku, sang kuthavar raakhu
Raya, bhaan maajha mala rhaai na
The crop has ripened and now needs guarding, for parrots have begun gathering around it. Someone hides nearby, casting sidelong glances and whistling at me. Tell me, how much longer can I conceal myself, and how long can I protect my modesty? My beloved, I am no longer in control of my senses. Here, the ripened crop represents her blossoming youth, while the gathering parrots represent the admirers drawn towards her.
Mala jau dya na ghari (aata wajle ki bara)
Mala jau dya na ghari (aata wajle ki bara)
Mala jau dya na ghari (aata wajle ki bara)
Mala jau dya na ghari (aata wajle ki bara)
Please let me go home now, for the clock has already struck twelve.
Hey, kashapayi chhalta, maga-maga firta
Asa kaay karta daaji, hila bheta ki yetya bajari
Ayy, sahachi bi gaadi geli, navachi bi geli
Aata barachi gaadi nighali
Why are you troubling her and following her everywhere? Sir, do not behave this way; you can meet her again at the next market. The six o’clock train has already left, as has the one at nine, and now the midnight train is about to depart.
Hila jau dya na ghari (aata wajle ki bara)
Mala jau dya na ghari (aata wajle ki bara)
Jee-jee re, jee
Please let her go home now, for the clock has already struck twelve.
Please let me go home now, for the clock has already struck twelve.
हो, चैत पुनवेची रात आज आलिया भरात
धडधड काळजात माझ्या माई ना
कधी, कवा, कुठं, कसा? जीव झाला येडापीसा
त्याचा न्हाई भरवसा तोल ऱ्हाई ना
चैत्र की पूर्णिमा की रात आज पूरे यौवन पर है और मेरे दिल की धड़कनें सँभाले नहीं सँभल रही हैं। न जाने कब, कहाँ और कैसे मेरा मन प्रेम में इतना बावरा हो गया। अब इसका कोई भरोसा नहीं रहा और मैं अपना संतुलन खोती जा रही हूँ।
राखली की मर्जी तुमच्या जोडीनं मी आले
पिरतीच्या या रंगी राया, चिंब ओली मी झाले
राया, सोडा आता तरी, काळ येळ न्हाई बरी
पुन्हा भेटू कवातरी, साजणा
मैंने आपकी इच्छा का मान रखा और आपके साथ चली आई। प्रिय, आपके प्रेम के रंग में मैं पूरी तरह भीग चुकी हूँ। लेकिन अब मुझे जाने दीजिए, यह समय ठीक नहीं है। मेरे प्रिय, हम फिर कभी मिलेंगे।
मला जाऊ द्या ना घरी (आता वाजले की १२)
मला जाऊ द्या ना घरी (आता वाजले की १२)
मला जाऊ द्या ना घरी (आता वाजले की १२)
मला जाऊ द्या ना घरी (आता वाजले की १२)
अब मुझे घर जाने दीजिए, क्योंकि रात के बारह बज चुके हैं।
हे, कशापायी छळता, मागं-मागं फिरता
असं काय करता दाजी, हिला भेटा की येत्या बाजारी
ए, सहाची बी गाडी गेली, नवाची बी गेली
आता १२ ची गाडी निघाली
आप इसे क्यों परेशान कर रहे हैं और इसके पीछे-पीछे क्यों घूम रहे हैं? दाजी, ऐसा मत कीजिए; अब इससे अगली हाट या बाज़ार के दिन मिल लेना। छह बजे की गाड़ी भी चली गई, नौ बजे वाली भी निकल गई और अब बारह बजे की गाड़ी रवाना होने वाली है।
(यहाँ सहगायक पुरुष को समझा रहे हैं, इसलिए “हिला” का अर्थ “इसे/इस लड़की को” है। यह हिस्सा तृतीय पुरुष में ही रहेगा।)
हिला जाऊ द्या ना घरी (आता वाजले की १२)
मला जाऊ द्या ना घरी (आता वाजले की १२)
जी-जी रे, जी
इसे अब घर जाने दीजिए, क्योंकि रात के बारह बज चुके हैं।
मुझे अब घर जाने दीजिए, क्योंकि रात के बारह बज चुके हैं।
हो, ऐन्यावानी रुप माझं, उभी ज्वानीच्या मी उंबऱ्यात
नादावलं खुळं-पीसं कबुतर हे माझ्या उरात
भवताली भय घाली रात मोकाट ही चांदण्याची
उगा घाई कशापायी? हाय नजर उभ्या गावाची
(हे नारी गं, राणी गं, हाय नजर उभ्या गावाची)
मेरा रूप आईने की तरह दमक रहा है और मैं युवावस्था की दहलीज़ पर खड़ी हूँ। मेरे सीने में दिल किसी बावरे कबूतर की तरह फड़फड़ा रहा है। यह खुली, चाँदनी रात मेरे मन में डर पैदा कर रही है। इतनी जल्दी क्यों कर रहे हो? पूरे गाँव की निगाह हम पर है।
(यहाँ “कबूतर” उसके प्रेम में बेचैन और फड़फड़ाते दिल का रूपक है, उसके शरीर का नहीं।)
ए, शेत आलं राखणीला, राघु झालं गोळा
शीळ घाली आडुन कोणी करून तिरपा डोळा
आता कसं किती झाकू, सांग कुठंवर राखू?
राया, भान माझं मला ऱ्हाई ना
खेत में फसल पक चुकी है और उसकी रखवाली का समय आ गया है, क्योंकि चारों ओर तोते इकट्ठा होने लगे हैं। कोई छिपकर तिरछी निगाहों से मुझे देखता हुआ सीटी बजा रहा है। अब मैं अपने आपको कितना और कैसे ढकूँ, और कब तक अपनी मर्यादा सँभालकर रखूँ? प्रिय, अब मुझे खुद अपना होश नहीं रहा।
(यहाँ “पकी फसल” नायिका की खिलती युवावस्था का और “इकट्ठा हुए तोते” उसकी ओर आकर्षित होने वाले पुरुषों का रूपक हैं।)
मला जाऊ द्या ना घरी (आता वाजले की १२)
मला जाऊ द्या ना घरी (आता वाजले की १२)
मला जाऊ द्या ना घरी (आता वाजले की १२)
मला जाऊ द्या ना घरी (आता वाजले की १२)
मुझे अब घर जाने दीजिए, क्योंकि रात के बारह बज चुके हैं।
हे, कशापायी छळता, मागं-मागं फिरता
असं काय करता दाजी, हिला भेटा की येत्या बाजारी
ए, सहाची बी गाडी गेली, नवाची बी गेली
आता १२ ची गाडी निघाली
आप इसे क्यों परेशान कर रहे हैं और इसके पीछे-पीछे क्यों घूम रहे हैं? दाजी, ऐसा मत कीजिए; अब इससे अगली हाट या बाज़ार के दिन मिल लेना। छह और नौ बजे की गाड़ियाँ पहले ही जा चुकी हैं और अब बारह बजे वाली गाड़ी भी निकलने वाली है।
(हिला जाऊ द्या ना घरी), आता वाजले की १२
मला जाऊ द्या ना घरी (आता वाजले की १२)
जी-जी रे, जी
इसे अब घर जाने दीजिए, क्योंकि रात के बारह बज चुके हैं।
मुझे अब घर जाने दीजिए, क्योंकि रात के बारह बज चुके हैं।
हो, आला पाड, झाला भार, भरली उभारी घाटा-घाटात
तंग चोळी अंग जाळी, टच्च डाळींब फुटं व्हटात
गार वारं झोबणारं, द्वाड पदर जागी ठरं ना
आडोश्याच्या खोडीचं मी कसं गुपित राखू कळं ना
(हे नारी गं, राणी गं, कसं गुपित राखू कळं ना)
मेरी देह अब पूरी तरह विकसित हो चुकी है और उसके हर अंग तथा हर मोड़ में युवावस्था की भरपूर उभार आ गई है। तंग चोली मेरे बदन को तपाती है और मेरी जवानी पके अनार की तरह फूट पड़ने को है। चुभती हुई ठंडी हवा चल रही है और मेरा शरारती आँचल एक जगह टिकता ही नहीं। मुझे समझ नहीं आता कि ओट में हुई उस शरारत का राज़ मैं कैसे छिपाकर रखूँ।
यह अंतरा जानबूझकर कामुक और रूपकात्मक है। “पका अनार” नायिका की विकसित देह और यौवन का संकेत है।
हे, मोरावानी डौल माझा, मैनेवानी तोरा
औंदाच्या गा वर्साला मी गाठलं वय १६
जीवा लागलिया गोडी, तरी कळ काढा थोडी
घडी आताची ही तुम्ही ऱ्हाऊ द्या
मेरी चाल मोर जैसी सजीली है और मेरा अंदाज़ मैना जैसा चंचल है। इसी वर्ष मैंने सोलहवाँ साल पूरा किया है। भले ही मेरे मन को भी इस प्रेम की मिठास भाने लगी है, फिर भी थोड़ा धैर्य रखिए और इस समय मुझे जाने दीजिए।
मला जाऊ द्या ना-, आता वाजले की १२
मला जाऊ द्या ना-, आता वाजले की १२
मला जाऊ द्या ना घरी, आता वाजले की १२
अहो, जाऊ द्या ना घरी…
मुझे अब घर जाने दीजिए, क्योंकि रात के बारह बज चुके हैं। अजी, अब तो मुझे जाने दीजिए।
हे, कशापायी छळता, मागं-मागं फिरता
असं काय करता दाजी, हिला भेटा की येत्या बाजारी
ए, सहाची बी गाडी गेली, नवाची बी गेली
आता १२ ची गाडी निघाली
आप इसे क्यों परेशान कर रहे हैं और इसके पीछे-पीछे क्यों घूम रहे हैं? दाजी, ऐसा मत कीजिए; अब इससे अगली हाट या बाज़ार के दिन मिल लेना। छह और नौ बजे की गाड़ियाँ जा चुकी हैं और अब बारह बजे वाली गाड़ी रवाना हो रही है।
हिला जाऊ द्या ना घरी, आता वाजले की १२
मला जाऊ द्या ना घरी, आता वाजले की १२
जी-जी रे, जी, झालं जी
इसे अब घर जाने दीजिए, क्योंकि रात के बारह बज चुके हैं।
मुझे अब घर जाने दीजिए, क्योंकि रात के बारह बज चुके हैं। जी हाँ, अब बहुत हुआ।
